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संसदीय चुनाव 2019 : भाजपा और भाजपाईयो के लिये बुरी ख़बर

April 15, 2019

फ़तेहपुर लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार साध्वी निरंजन ज्योति एवं उनके समर्थकों के लिये बुरी ख़बर है। चौकीदार/ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बार फ़तेहपुर नहीं आ रहे है। मोदी की चुनावी सभा से बिगड़ी बना लेने की आस में बैठे भाजपाइयो के इस ख़बर से होश उड़ गये है और अब डैमेज कंट्रोल के दूसरे तरीक़ों पर तेज़ी से मंथन शुरू हो गया है। उधर साध्वी के लिये स्थानीय कुछ भाजपाई जनप्रतिनिधियो के दरवाज़े अभी तक सलीक़े से न खुलने की बात हाईकमान तक पहुचने से थिंक टैंक में खलबली मची है। उल्लेखनीय है कि देश के प्रधानसेवक/ चौकीदार आदि आदि नामो से सम्बोधित किये जाने वाले प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी जनसभा का इस बार स्थानीय भाजपा प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति को लाभ नहीं मिल पायेगा। भाजपा के उच्च पदस्थ भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार संसदीय चुनाव के दृष्टिगत मोदी की चुनावी रैलियों के अतिगोपनीय चार्ट में फ़तेहपुर का नाम शामिल नहीं है। इस बार मोदी 25 या 27 अप्रैल को तिंदवारी (बाँदा) में जनसभा करेंगे और वही से फ़तेहपुर, बाँदा व हमीरपुर के पार्टी प्रत्याशियों को जिताने की मतदाताओं से अपील करेंगे। ग़ौरतलब है कि भाजपा के ज़िला एवं क्षेत्रीय संगठन की तरफ़ से भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फ़तेहपुर लाने के बाबत कोई पहल नहीं की गई है! पूर्व में भाजपा की व्यवस्था के तहत ज़िला और क्षेत्रीय संगठन बाक़ायदे एक प्रस्ताव केंद्रीय चुनाव संचालन समिति के मुखिया को भेजता था, जिसमें प्राथमिकता वाले स्टार प्रचारकों के कार्यक्रमों के लिये अनुरोध किया जाता था, किन्तु इस बार स्थानीय मशीनरी इसमें भी काफ़ी पीछे रह गई, जब तक काग़ज़ी खानापूरी हुई तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी! सूत्र तो यह भी बताते है कि यहाँ से मोदी के कार्यक्रम की माँग ही क़ायदे से नहीं की गई। बताते चले कि 2014 के संसदीय चुनावों के ऐन मौक़े पर भाजपा ने सभी को चौंकाते हुए पार्टी की हमीरपुर विधायक साध्वी निरंजन ज्योति को फ़तेहपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था और फिर मोदी की जनसभा ने ऐसी झाड़ू लगाई थी कि तक़रीबन पाँच लाख वोट अप्रत्याशित ढंग से उनकी झोली में आ गये थे, ये चुनाव इसलिये भी ख़ासा याद किया जाता है कि सूबे में सत्ता होने के बावजूद तत्कालीन सांसद राकेश सचान अपनी ज़मानत तक नहीं बचा पाये थे और बुंदेलखंड के क़द्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी का बेटा अफ़ज़ल सिद्दीक़ी पिता के आदमक़द और लाख जतन के बावजूद लगभग दो लाख के भारी अन्तर से चुनाव हार गया था। ऐसा माना जाता है कि मोदी की जनसभा के बाद ही साध्वी को अप्रत्याशित ढंग से भारी जीत मिली थी। साध्वी और उनके समर्थकों को इस बार भी सारी बिगड़ी सिर्फ़ और सिर्फ़ मोदी की जनसभा से सुधर जाने का भरोसा था किन्तु इस बार चौकीदार के फ़तेहपुर न आने की ख़बर मात्र से तगड़ा झटका लगा है और अब ऐन-केन प्रकारेंण मोदी के न आने से सम्भावित डैमेज को कंट्रोल करने की तैयारी में भाजपाई सिस्टम जुट गया है। इस संदर्भ में जब भाजपा के कुछ जिम्मेदार नेताओ से वार्ता का प्रयास किया गया तो उनका सिर्फ़ एक जवाब था कि जब प्रत्याशी ने ही यहाँ से पुनः लड़ने या न लड़ने के निर्णय में समय जाया कर दिया तो किसी और पर तोहमत का कोई मतलब ही नहीं! यहाँ पर यह भी बता दे कि विगत विधानसभा चुनाव में भी समूची स्थानीय सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को अप्रत्याशित जीत सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभा के कारण ही मिल पाई थी, किन्तु इस संसदीय चुनाव में भाजपाईयो को सीधे “मोदी के चक्षु-स्पर्श मैजिक” का लाभ शायद नहीं मिल पायेगा! भाजपाई तीरंदाज़ो को इस बार अपनी ही दम का अहसास कराना पड़ेगा! यहाँ पर यह भी बता देना ज़रूरी है कि शायद बाबा रामदेव, हेमामालिनी सरीखे कई स्टार प्रचारकों की चुनावी सभाए भी फ़तेहपुर में न लग पाये। इतना ही नहीं मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ, केशव मौर्या की भी सभाओं की कोई तारीख़ तय नहीं है! साध्वी के लिये प्रचार करने आने वालों में केंद्रीय ग्रहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कपड़ा मन्त्री स्मृति ईरानी समेत तीन और का आना लगभग तय है। वही एक बार फिर साध्वी ऋभरा ने यह कहकर अपनी गुरु बहन साध्वी निरंजन ज्योति को मायूस कर दिया है कि चुनावी जनसभा से उन्हें दूर ही रखे! वही मवई धाम से अपेक्षित सहयोग और आशीर्वाद अभी तक तय नहीं है! भाजपा थिंक टैंक ने यहाँ का चुनाव कुछ इसलिये भी स्थानीय दम के भरोसे छोड़ दिया है क्योंकि प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति अपने आप में पार्टी की हाई प्रोफ़ाइल स्टार प्रचारक है, और प्रत्याशी के साथ-साथ केन्द्रीय मन्त्री और निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर का तमग़ा भी उनके नाम के साथ जुड़ा हैं! सूत्रों की माने तो पार्टी की प्रचार समिति ने मोदी की यहाँ जनसभा के बारे में माना कि साध्वी का क़द पिछले चुनाव के मुक़ाबले काफ़ी बढ़ गया है, ऐसे में चौकीदार के बग़ैर भी फ़तेहपुर की सीट सुरक्षित रखी जा सकती है! संसदीय चुनाव में फ़तेहपुर सीट को पुनः जीतने के भाजपाई महामिशन पर स्थानीय भाजपा में गुटबंदी भी पलीता लगा सकती है! भरोसेमंद सूत्रों की माने तो पार्टी के दो क़द्दावर जनप्रतिनिधियो के दरवाज़े अभी तक सलीक़े से साध्वी के लिये नहीं खुले हैं! यही नहीं संगठनात्मक स्तर पर चर्चा में चल रही गुटबाज़ी भी समस्या का सबब बन सकती है! फ़िलहाल इस सीट पर त्रिकोणीय मुक़ाबले की स्थिति बन रही है और गठबन्धन व कांग्रेस से भाजपा को कड़े मुक़ाबले के लिये तैयार रहना होगा! .


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